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सूना हैं वाे घर , जिस में तूम नहिं।

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राह में काटें ताे हूंगे,

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दाे लाेग का पयार कभी कम नहीं हाेगा,

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चाहे हम लाेग कितने भी दूर हाे।

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खूदा कि महुबबत सची हाेती हैं।

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ज़िदगीं अगर बाखी हैं ,

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सुरज के बाहाैं में ,अब हें ये जिंदागी।

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हम मूसाफिर हैं ,तेरे दिल के रासते के।

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साथ निभाएंगे हम तेरा ,

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जिंदागी एक खूबसुरत सा सफर हैं,

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पयार एक खुबसूरत लमहा हौं।

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आज एक मरताबा मुझे चाहकर ताे द्खाे,

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दिल का है जाे हाल ,कैसे में बताें,

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हम शिकवा करें भी तो किस्से,

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कुछ तन्हाईयां वेबजह नही होतीं,

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हम चाहते तो नही थे उनसे दूर होना,

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हर खूशबु में तेरी याद हैं। बस तेरी कमी हैं।

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दिल काे बस तेरी ज़रूरत थी।

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इस तनहा सकर में ,

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ज़िन्दगी की कशमकश से परेशान बहुत है, 

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तूने तो सुना होगा मेरे दिल का धड़कना, 

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यह कह कर मेरा दुश्मन मुझे हँसता छोड़ गया, 

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वाक़िफ़ हैं हम दुनिया के रिवाजों से, 

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तेरी यादों का ढोल बजते ही 

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हम समंदर है हमें खामोश रहने दो 

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तेरे सिवा कोई भी नाम पसंन्द नही दिल को,

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एक हल्की सी झलक क्या मिली बेचैन नज़रों को,